|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
چاپ شود |
|
|
|
علاقه مندیها |
|
|
|
ارسال به ایمیل |
|
|
|
ارسال به |
|
|
|
ارسال به
|
|
|
|
ارسال به |
|
درد, سبز
گرویدن, ما
از برای, گریدن مبود.
اما
اینگونه شد
که چشمان, ما پُر اَبرانه شد.
و باریدن, ما
شانه های هم را
هر دَم را.
***
می روید چیزی از شانه های ما
که نه شادی ست،
چیزی سبزوار
دردوار
که می زید.
فرانکفورت 08.11.1996
|