|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
چاپ شود |
|
|
|
علاقه مندیها |
|
|
|
ارسال به ایمیل |
|
|
|
ارسال به |
|
|
|
ارسال به
|
|
|
|
ارسال به |
|
گر
باریکهء پندار مرا گر
تا انگیزه های درخت
راهی بود
شعر, من نخواهد هرگز غنود.
درک, عناصر, درخت
و نیز
پرواز, آگاهمند, برگ.
خیال:
بوریاْ نی, کلام را
شکرین می کند
شعر می کند.
فرانکفورت 10.07.1996
|