|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
چاپ شود |
|
|
|
علاقه مندیها |
|
|
|
ارسال به ایمیل |
|
|
|
ارسال به |
|
|
|
ارسال به
|
|
|
|
ارسال به |
|
شطح دوم
شهری که آن سوی شقایق می شود طالع
در جاده ی جادوی ابریشم
دروازه های عالمی دیگر
به روی آدمی دیگر
آن عالم و آدم که حافظ آرزو ی کرد
نزدیک است
آنک
شهری که از دروازه های آن
هم بوی جوی مولیان خیزد
هم یاد یار مهربان اید
|