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درد مشترک
زخمِ تمام انسان ها را برادرم
به بارانِ همین باور خیس ماندهام
که شامگاهان شعرهایم را آواز میدهم
حتا اگر“ خروس بی محل” نام گیرم
که زاغ را
سوغاتی جز همان تکرارِ تعفن نیست
که بر تاجِ تاریخ پیداست .
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